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श्री स्वामी प्रेमाश्रम संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय, तिर्वा कन्नौज

मानव स्वभाव को सूरज की पहली किरण की तरह अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले श्री स्वामी प्रेमाश्रम जी महाराज दंडी स्वामी का जन्म उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद में स्थित महादेवपुर नामक ग्राम में हुआ था । इनकी माता का नाम तुलसी एवं पिता का नाम श्री राम नाथ दुबे था महाराज बचपन से ही संत स्वभाव के रहे एवं भारतीय संस्कृत में उनकी विशेष रूचि रही है ।

अपने घर की विपरीत परिस्थितियों का निराकरण करने के पश्चात पूरे भारतवर्ष का भ्रमण किया । तदोपरांत कानपुर देहात में स्थित (शिवराजपुर) रेलवे स्टेशन से उत्तर की ओर गंगा तट के किनारे श्याम नगर गांव के पास दंडी आश्रम की स्थापना की दिनों दिन स्वामी जी के शिष्यों की संख्या बढ़ती गई । समय उपरांत स्वामी जी के शिष्य श्री रणवीर सिंह जी के माध्यम से स्वामी जी त्रिपुर सुंदरी माता की नगरी दौलेश्वर धाम (शिव मंदिर) तिर्वा जनपद कन्नौज में कुछ दिनों ठहरने के बाद सदा सत्संग प्रेमी एवं अपने ब्रह्मविचारों में स्थित श्री स्वामी जी के हृदय में नवीन लोक कल्याण की अभिलाषा जागृत हुई । उसी समय श्री स्वामी जी के शिष्य श्री गुरुप्रसाद शास्त्री ने गुरु भक्त विभोर भावों से विद्यालय का नामकरण श्री स्वामी प्रेमाश्रम के नाम पर 15 नवंबर 1992 में किया, जिसका नाम श्री स्वामी प्रेमाश्रम संस्कृत विद्यालय पड़ा । जिसके संस्थापक श्री स्वामी प्रेमाश्रम जी महाराज थे । 8 जून सन 2008 को उनका देहावसान हो गया ।

स्वामी जी का लक्ष्य - कोरे कागज के समान बालक / बालिकाओं को लेखानुरूप परिवर्तित करना जिनके रक्त कोशिकाओं में देश प्रेम का प्रबल प्रभाव हो । चेहरे पर तेज इंद्रियों में संयम वाणी में मधुरता चरित्र में दृढ़ता और कर्म में आस्था परिस्वार्थ की भावना एवं महापुरुषों की जीवन स्मृतियाँ मानव पटल पर अवतरित हो सके, एवं भारतीय संस्कृति को सृदढ़ एवं अलौकिक बनाए रख सकेंगे । सभी भाषाओं की जननी भारत के गौरव और देवों की वाणी कही जाने वाली संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार हो सके ।

ऐसी विचारों के साथ महाराज जी की प्रेरणा से प्रबंधक श्री रणवीर सिंह जी ने अपनी सकारात्मक सोच के साथ अथक परिश्रम ईमानदारी एवं मानवीयता की भावना से विद्यालय को शिखर पर पहुंचाने का पुनीत कार्य किया और आज भी अपना अमूल्य समय देकर विद्यालय की प्रगति में अपने तन मन धन से समर्पित है।

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